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Students of Students of Student of Botany Chemistry History

Wednesday, 23 January 2019

Students of Students of Student of Botany Chemistry History 

उदाहरणस्वरूप विद्यार्थी जगत (Universe Of Students) को कई विशेषताओं जैसे उस, लिंग, वजन, लम्बाई, मातृभाषा, इत्यादि के आधार पर बांटा जा सकता है । इस उपसूत्र की मांग है कि वर्गों की पंक्ति एकल में विभाजित करते समय एक और केवल एक ही विशेषता का प्रयोग करना चाहिए | अगर ऐसा नहीं होता है, तो इस उपसूत्र का उल्लंघन होगा । इसे एक उदाहरण द्वारा समझा जा सकता है । अगर विद्यार्थी जगत को विभाजित करने के लिए लिंग और विषय इन दो विशेषताओं का एक साथ प्रयोग किया जाता है तो निम्न वर्ग प्राप्त होंगे :
इस विभाजन के अनुसार प्रत्येक विद्यार्थी की दो अलग-अलग पंक्तियाँ बनेगी और उपसूत्र का उल्लंघन होगा । किन्तु इन दोनों विशेषताओं के आधार पर विद्यार्थियों को एक ही पंक्ति में व्यवस्थित किया जा सकता है । यदि इनका प्रयोग क्रमशः एक के बाद एक निम्न प्रकार से किया गया हो ।
अगर अनिवार्य हो तो विभिन्न विशेषताओं के आधार पर निर्मित विभिन्न " को मिला कर एक पंक्ति बनाई जा सकती है, अर्थात उपर्युक्त उदाहरण की तरह विभिन्न विशेषताओं को विभाजन प्रक्रिया में क्रमशः एक के बाद एक प्रयोग किया जाय तो इस आधार पर निर्मित पंक्ति  विकसित विभिन्न समकक्ष विषयों को पंक्ति में उसी क्रम में व्यवस्थित करना चाहिये जिस चरणाक्रम में उनका विकास हुआ हो ।
इस सम्बन्ध में सी.सी. तथा डी.डी.सी. में आयुर्विज्ञान मुख्य वर्ग से एक एक उदाहरण निम्न प्रकार है : Subject  यू.डी.सी. में अनेक स्थानों पर इस सिद्धान्त की अवहेलना हुई है ।

 स्थानीय समीपता का सिद्धान्त (Principle of Spatial Contiguity)

इस सिद्धान्त के अनुसार 'यदि विषयों की पंक्ति में विषय अथवा एकलों की पंक्ति में एकल स्थानीय समीपता में घटित होते हैं- मोटे रूप से एकदिशीय या आरीय या वृत्ताकार रेखा में- तो इनको समानान्तर स्थानीय अनुक्रम में व्यवस्थित करना चाहिये, केवल उस स्थिति को छोड़कर जब कोई अन्य महत्वपूर्ण तथ्य इस अनुक्रम की अनुपालना की अनुमति न देता हो ।'
| रंगनाथन ने इस सिद्धान्त को अनेक विरोधाभासी युग्मों (परस्पर विरोधी सिद्धान्तों की जोड़ी) के रूप में प्रस्तुत किया है । रंगनाथन के अनुसार इन युग्मों में किसी एक युग्म के सिद्धान्त को (जो भी अधिक सहायक अनुक्रम प्रदान करता हो) चुनना चाहिए ।
अब हम स्थानीय समीपता के सिद्धान्त के अन्तर्गत उल्लेखित युग्मों में से प्रत्येक का अलग-अलग अध्ययन करेंगे ।

खड़ी रेखा पर स्थित सत्ताओं के लिए सिद्धान्त (Principles for Along a Verticles line)

इसके अन्तर्गत निम्न दो सिद्धान्त आते हैं : तल से ऊपर की ओर का सिद्धान्त (Principles of Bottom Upward)
इस सिद्धान्त के अनुसार यदि विषयों की एक पंक्ति में विषयों तथा एकलों की एक पंक्ति में एकलों को सुविधापूर्वक एक खड़ी रेखा पर स्थित हुआ माना जा सकता हो तो उन्हें नीचे से ऊपर की ओर 'के क्रम में व्यवस्थित किया जा सकता है, यदि यह क्रम सहायक हो ।'
| निम्न उदाहरण में पौधों के विभिन्न अंगों की क्रम व्यवस्था इस सिद्धान्त के आधार पर
अनन्यता का उपसूत्र का प्रयोग सामान्यता सभी वर्गीकरण पद्धतियों में हुआ है ।
3.3 सहायक अनुक्रम का उपसूत्र (Cannon of Helpful Sequence)
सहायक अनुक्रम के उपसूत्र के अनुसार एक पंक्ति में वर्गों का अनुक्रम सहायक होना चाहिए | यह अनुक्रम वर्गाचार्य की स्वेच्छा पर आधारित न होकर कुछ सिद्धान्तों पर आधारित चाहिए । किन्तु यह भी ध्यान में रखना आवश्यक है, कि जिन सिद्धान्तों को सहायक अनुक्रम के लिये प्रयोग किया जा रहा है, उनकी अनुपालना से अन्य महत्वपूर्ण आवश्यकताओं का उल्लंघन न होता हो । सहायक अनुक्रम के उपसूत्र का प्रतिपादन करते हुए रंगनाथन ने लिखा है। | "वर्गों की किसी पंक्ति को तथा पंक्ति में निहित श्रेणीबद्ध एकलों (Ranked Isolates) को इस प्रकार से व्यवस्थित करना चाहिए जिससे वह व्यवस्था जिनके लिये की गई हो, उनके लिए सहायक हो ।"
रंगनाथन ने सहायक क्रम की प्राप्ति के लिए निम्नलिखित सिद्धान्तों का प्रतिपादन किया है : |

1. परवर्तीकाल का सिद्धान्त (Principal of later in Time) 

2. परवर्ती विकास का सिद्धान्त (Principal of later in evolution)
3. स्थानीय समीपता का सिद्धान्त (Principal of Later in Contiguity)
 3.1 खड़ी रेखा पर स्थित सत्ताओं के लिये सिद्धान्तः (Principal for Entities Along a Vertical Line)
3.1.1 तल के ऊपर की ओर का सिद्धान्त (principle of Bottom-Upwards)
3.1.2 ऊपर के तल की ओर का सिद्धान्त (principle of Top Downwards)
3.2 आड़ी रेखाओं पर स्थित सत्ताओं के लिये सिद्धान्त (principle of Entities Along a Horizontal Line)
3.2.1 बायीं ओर से दायीं ओर का सिद्धान्त (Principle of Left to Right)
32.2 दायीं ओर से बायीं ओर का सिद्धान्त (Principle of Right to Left) 3.3 वृत्त देखा पर स्थित सत्ताओं के लिये सिद्धान्त (principle for Entities Along a Circular Line) 3.3.1 परिधि के साथ-साथ घड़ी की सुई की दिशा का सिद्धान्त (principle of
Clockwise Direction) 3.3.2 परिधि के साथ-साथ घड़ी की सुई की विपरीत दिशा का सिद्धान्त (principle
of Counter clockwise Direction) 3.4 वृत्त के अर्द्धव्यवसाय पर स्थिति सत्ताओं के लिये सिद्धान्त (principle for Entities Along a Radial Line)
3.4.1 परिधि से केन्द्र की ओर का सिद्धान्त (principle of Periphery to Centre)
3.4.2 केन्द्र से परिधि की ओर का सिद्धान्त (principle of center to periphery)
112
3.5 दूर स्थिति का सिद्धान्त (Principle of Away From Position) 4. मात्रा आधारित सत्ताओं के लिए सिद्धान्त (principle of Quantitative
Measure)

4.1 मात्रा वृद्धि का सिद्धान्त (Principle of increasing Quantity)

4.2 मात्रा हास का सिद्धान्त (Principle of decreasing Quantity) 5. जटिलता वृद्धि का सिद्धान्त (Principle of Increasing Copmplexity) 6. प्रामाणिक अगम का सिद्धान्त (Principle of Cononical Sequence) 7. साहित्यिक मांग का सिद्धान्त (Principle of Literary warrant) 8. वर्णानुक्रम का सिद्धान्त (Principle of Alphabetical Sequence)
अब इन सहायक अनुक्रम के सिद्धान्तों का वर्णन एक-एक करके किया जा रहा है। परवर्ती काल का सिद्धान्त (Principle of Later In Time) ।
इस सिद्धान्त के अनुसार 'यदि विषयों की एक पंक्ति में विषयों अथवा एकलों की पंक्ति में एकलों की उत्पत्ति का समय भिन्न-भिन्न हो तो इनको समानान्तर प्रगामी काल अनुक्रम में व्यवस्थित किया जाना चाहिए केवल उस स्थिति को छोड़कर जब कोई अन्य महत्वपूर्ण तथ्य इसकी अनुपालना की अनुमति नहीं देता हो ।' | इस सिद्धान्त की मांग है कि विषयों अथवा विचारों को उनकी उत्पत्ति के समय के आधार पर इस प्रकार व्यवस्थित वर्गीकरण एवं किया जाना चाहिये, कि उनका क्रम उत्तरोत्तर अर्थात पहले उत्पन्न होने वाले विषय पहले रख कर क्रमशः अंत में बाद सूचीकरण- में उत्पन्न होने वाले विषयों अथवा एकल विचारों को व्यवस्थित किया जाए जिससे कि उनका अनुक्रम ही उनके उत्पत्ति सिद्धांत के चरणों को स्पष्ट कर दें ।
सी.सी. में विभिन्न धर्मों की उत्पत्ति के काल के आधार पर धर्मों को व्यवस्थित कसे के लिये इस सिद्धान्त का प्रयोग हुआ है । उदाहरणस्वरूप:
Vedic Hinduism Post-Vedic Hinduism
01
Jainism
Buddhism
Judaism
Christainity Islam

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