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पुस्तकालय संघों के निम्नलिखित कार्यों की गणना

Thursday, 3 January 2019

पुस्तकालय संघों के निम्नलिखित कार्यों की गणना

(Advisory Committee for Libraries) की स्थापना 1957 में के. पी. सिन्हा की अध्यक्षता में की थी। इस समिति ने पुस्तकालय संघों के निम्नलिखित पांच मुख्य कार्य बताये हैं: -
1. पुस्तकालय संघ ग्रन्थालयियों में भ्रातृभाव पैदा करने का प्रयत्न करता है। वह जाति,
नस्ल, रंग तथा राष्ट्रीयता की दीवारें तोड़ पुरूष तथा महिलाओं में ऐसी व्यावसायिक भावना पैदा करता है जिससे उनके सहयोगियों की सांस्कृतिक प्रगति हो सके। पुस्तकालय संघ ग्रन्थालयियों को एक आचार-संहिता प्रदान करते हैं जिससे समाज में उनके सम्मान में वृद्धि होती है।
3. पुस्तकालय संघ, ग्रन्थालयियों के प्रशिक्षण का स्तर बढ़ाने के लिए प्रयत्न करते हैं। जिससे वे अपने कार्यों को अधिक योग्यता एवं कुशलता के साथ करने में समर्थ हों तथा समाज की अधिक से अधिक भलाई कर सकें।
4. पुस्तकालय संघ एक व्यावसायिक संगठन (Trade Union) के रूप में ग्रन्थालयियों हेतु बेहतर सेवा दशायें (Service Conditions) प्रदान करने के लिए प्रयत्न करते हैं।
5. जिस भी देश में पुस्तकालय संघ है वहाँ पर ये पुस्तकालय प्रसारण सेवाओं (Library Extension Services) के लिए कीर्तिमान हैं।

एस. एस. अग्रवाल ने अपने ग्रन्थ 'पुस्तकालय एवं समाज' में पुस्तकालय संघों के निम्नलिखित कार्यों की गणना की है:

1. समस्त पुस्तकालय कर्मचारियों तथा पुस्तकालय हितैषियों को संगठित करना;
2. पुस्तकालय आंदोलन को गति प्रदान करना;
3. पुस्तकालय कर्मचारियों के कार्य करने की दशाओं में सुधार करवाना और उनके
सामाजिक, आर्थिक तथा नैतिक स्तर में उन्नति करवाना;
4. किसी व्यावसायिक मित्र की आकस्मिक मृत्यु अथवा रोग की स्थिति में आर्थिक सहायता प्रदान करना;
5. सम्मेलन, परिसंवाद आदि आयोजित करके व्यावसायिक विषयों तथा कर्मचारियों की
समस्याओं पर चर्चा करना और उनमें सुधारों आदि के सम्बन्ध में सुझाव देना;
6. अन्तरग्रंथालयीन आदान (Inter-Library Loan) हेतु नियमों की रचना करना और उस
दिशा में प्रयास करना;
7. ग्रन्थालयीनता (Librarianship) में प्रशिक्षण देना और परीक्षायें आयोजित करना। विशेष रूप से विशिष्ट ग्रन्थालयीनता (Special Librarianship), प्रलेखन (Documentation), ग्रन्थ-सूची (Bibliography) निर्माण आदि में प्रशिक्षण देना;
8. पुस्तकालय प्रशिक्षण में उच्च स्तर तथा मानकीकरण स्थापित करने और उसको स्थिर रखने के लिये पुस्तकालय प्रशिक्षण केन्द्रों को मान्यता प्रदान (Accredition) करना;
9. संघ-सूचियां (Union Catalogues) तथा ग्रन्थ सूचियाँ (Bibliographies) का निर्माण; अनुवाद कार्य (Translation work), प्रलेखन (Documentation) कार्य आदि करना;
10. पुस्तकालय अधिनियम (Library act) पारित करवाने और विभिन्न स्थानीय निकायों
(Local bodies) द्वारा उसके अपनाने के सम्बन्ध में सक्रिय प्रयास करना;
11. पुस्तकालय विज्ञान, प्रलेखन (Documentation), ग्रंथ सूची (Bibliography) निर्माण
में शोध कार्य को गति देना;
12. व्यवसाय तथा व्यावसायिक व्यक्तियों के लाभार्थ सामयिक प्रकाशन (Periodical publications) का प्रकाशन करना;
13. व्यावसायिक प्रशिक्षित व्यक्तियों की पंजी (Register) निर्मित करना; और
14. अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अन्तर्राष्ट्रीय संघों से सहयोग करना।

4. पुस्तकालय संघ के प्रकार

पुस्तकालय संघों के प्रकारों का विभाजन भौगोलिक, कार्य विशेष आदि के आधार निम्नलिखित प्रकार से विभाजन किया जा सकता है: -
4.1. भौगेलिक आधार पर
भौगोलिक आधार पर पुस्तकालय संघ निम्नलिखित प्रकार के हो सकते हैं:
(अ) अन्तर्राष्ट्रीय पुस्तकालय संघ :- ऐसे पुस्तकालय संघ जिनका कार्यक्षेत्र किसी देश विदेश की सीमा तक सीमित न होकर सम्पूर्ण विश्व में फैला रहता है उन्हें अन्तर्राष्ट्रीय पुस्तकालय संघ कहते हैं। इस श्रेणी में इन्टरनेशनल फेडरेशन फार इन्फॉर्मेशन एण्ड डाक्यूमेन्टेशन (FID) आती है।
(ब) राष्ट्रीय पुस्तकालय संघ:- किसी देश की सीमाओं तक सीमित कार्य क्षेत्र के पुस्तकालय संघ इस श्रेणी में सम्मलित हैं। भारत के इण्डियन लाइब्रेरी एसोसियेशन, संयुक्त राज्य का अमेरिकन लाइब्रेरी एसोसियेशन तथा ग्रेट ब्रिटेन की लाइब्रेरी एसोसियेशन की गणना राष्ट्रीय पुस्तकालय संघ के रूप में की जा सकती है।
(स) राज्य स्तरीय तथा क्षेत्रीय पुस्तकालय संघ:- इस श्रेणी के अन्तर्गत ऐसे पुस्तकालय संघ आते हैं जिनका कार्यक्षेत्र किसी प्रदेश या क्षेत्र विशेष तक सीमित है। जैसे- राजस्थान पुस्तकालय संघ, दिल्ली लाइब्रेरी एसोसिएशन आदि।

 4.2. विशिष्टता के आधार पर ।

विशिष्टता के आधार पर पुस्तकालय संघ निम्नलिखित प्रकार के हो सकते हैं:
(अ) । विशिष्ट पुस्तकालय संघः- विशिष्टता के आधार पर भारत में राष्ट्रीय स्तर पर इण्डियन
पब्लिक लाइब्रेरी एसोसियेशन एवं आइजलिक, अमेरीका की स्पेशल लाइब्रेरी एसोसियेशन, ग्रेट ब्रिटेन की एसलिब (Aslib) आदि आते हैं। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर इन्टरनेशनल फेडरेशन फार इन्फॉर्मेशन एण्ड डाक्यूमेन्टेशन का उल्लेख किया जा सकता है। सहायक ग्रन्थालयियों का संघ:- ग्रेट ब्रिटेन की एसोसियेशन आफ असिस्टेंट लाईब्रेरियन्स की गणना इस श्रेणी के संघ के रूप में की जा सकती है। विशेष प्रकार के ग्रन्थालयियों का संघ :- एक विशेष प्रकार के पुस्तकालय कर्मचारियों के संघों की गणना इस श्रेणी में की जा सकती है। जैसे भारत में एगलिस (Association of Government of India Libraries), संयुक्त राष्ट्र अमेरीका की एसोसियेशन आफ कॉलेज एण्ड रिसर्च लाइब्रेरीज इस प्रकार के संघ है। पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के शिक्षकों का संघ:- इस प्रकार के संघ में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के शिक्षा कार्य से जुड़े व्यक्ति इसके सदस्य बनते है। भारत में आइटलिस (Indian Association of Teachers of Library and Information Science) इस प्रकार का संघ है।7

4.3. संघों का संघ (Confederation of Library Association)

विश्व के विभिन्न देशों के पुस्तकालय संघों के संघ इस श्रेणी में आते है जैसे इन्टरनेशनल फेडरेशन आफ लाइब्रेरी एसोसियेशन एण्ड इन्स्टीट्यूट (International Federation of Library Association and Institutes)। इनका मुख्य कार्य सदस्य पुस्तकालय संघों को अपनी गतिविधियों के सुचारू संचालन में तकनीकी प्रदान करना है।
4.4. संघों की शाखायें (Divisions of Library Association)
पुस्तकालय संघों के कार्य को विभिन्न कार्य क्षेत्र में विभाजित कर कार्य को सुचारू रूप से संचालन हेतु शाखाओं में विभक्त किया जाता है जैसे (Public Library Division of ALA)। इसी प्रकार पुस्तकालय संघ की शाखायें राज्य, जिला स्तर आदि पर स्थापित की जा सकती हैं।
5. प्रमुख पुस्तकालय संघ
कुछ प्रमुख पुस्तकालय संघों के क्रिया कलापों का विवरण निम्नांकित प्रकार है:
5.1. भारतीय पुस्तकालय संघ (Indian Library Association)
5.1.1 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background)
जहां विश्व के अधिकतर देशों में राष्ट्रीय पुस्तकालय संघों की स्थापना पहले हुई एवं राज्य स्तरीय पुस्तकालय संघ बाद में गठित हुएवही भारत में इसके विपरीत कुछ राज्य स्तरीय पुस्तकालय संघों का गठन भारतीय पुस्तकालय संघ के गठन से वर्षों पूर्व हुआ। जैसेआन्ध्रप्रदेश पुस्तकालय संघ (1914), महाराष्ट्र पुस्तकालय संघ (1921), बंगाल पुस्तकालय संघ (1923), एवं पंजाब पुस्तकालय संघ (1929) में स्थापित हुए।
भारतीय पुस्तकालय संघ की विधिवत स्थापना से पूर्व सामान्यतया इसके सम्मेलन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वार्षिक सम्मेलनों के साथ ही आयोजित किये जाते थे। ऐसे सात सम्मेलन 1919 से 1929 के मध्य भारत के विभिन्न शहरों में आयोजित किये गये जिनकी अध्यक्षता देश के राष्ट्रीय नेताओं द्वारा की गई थी। 

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