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भारत के राज्यों में पुस्तकालय अधिनियम : उनकी विशेषतायें (Library Legislation in Indian StatesTheir Salient Features)

Thursday, 3 January 2019

इकाई -11 : भारत के राज्यों में पुस्तकालय अधिनियम : उनकी विशेषतायें (Library Legislation in Indian StatesTheir Salient Features) 

उद्देश्य इस इकाई के निम्नलिखित उद्देश्य है -
1. भारत के राज्यों में लागू पुस्तकालय अधिनियम की विशेषताओं से अवगत होना,
2. पुस्तकालय अधिनियम के परिप्रेक्ष्य में राज्यों की पुस्तकालय पद्धति, संरचना, वित्त,
उपलब्ध संसाधन एवं पुस्तकालय सेवाओं की स्थिति से परिचित होना, तथा
3. विभिन्न राज्यों के पुस्तकालय अधिनियम निहितार्थों के अन्तर से अवगत होना। संरचना
1. विषय प्रवेश
2. पुस्तकालय अधिनियम विभिन्न राज्यों में
3. सारांश
4. अभ्यासार्थ प्रश्न
5. विस्तृत अध्ययनार्थ
1. विषय प्रवेश
पुस्तकालयों में संग्रहीत सामग्री की सुरक्षा, विकास तथा उसके उपयोग को एवं इस संस्था और इनकी सेवाओं को स्थायित्व प्रदान करने के लिए एक वैधानिक पृष्ठभूमि की आवश्यकता होती है और उसके लिए जो अधिनियम बनाया जाता है उसे पुस्तकालय अधिनियम कहते है।
भारत में सार्वजनिक पुस्तकालयों एवं पुस्तकालय अधिनियम की स्थिति अन्य देशों से कुछ अर्थों में भिन्न है। सार्वजनिक पुस्तकालय संविधान की 7वी सूची में पुस्तकालय राज्य का विषय है। अत: पुस्तकालय अधिनियम भी राज्य सरकार दारा पारित करने के पश्चात अपने अपने राज्य में लागू किया जाता है।
डॉ. रंगनाथन ने भारत में पुस्तकालय अधिनियम की आवश्यकता पर अत्यधिक बल दिया। उनके अथक प्रयास के फलस्वरूप भारत में पुस्तकालय अधिनियम सन् 1948 में मद्रास राज्य में लागू हुआ जिसे मद्रास सार्वजनिक पुस्तकालय अधिनियम के नाम से जाना जाता है। दूसरा पुस्तकालय अधिनियम हैदराबाद राज्य में सन् 1905 में पारित हुआ जिसे हैदराबाद सार्वजनिक पुस्तकालय अधिनियम नाम से जाना जाता है। लेकिन राज्य पुनर्गठन आयोग 1956 की संस्तुतियों के पश्चात हैदराबाद राज्य के विभिन्न जिलों को आन्ध्रप्रदेश, महाराष्ट्र एवं तमिलनाडु में सम्मिलित कर लिया गया जिसके फलस्वरूप राज्य का अस्तित्व समाप्त हो गया।
इसके पश्चात सन् 1960 में आन्ध्र प्रदेश राज्य में सार्वजनिक पुस्तकालय अधिनियम लागू हुआ। डॉ. रंगनाथन के प्रयासों के फलस्वरूप कर्नाटक एवं महाराष्ट्र में क्रमश: सन् 1965 एवं 1967 में सार्वजनिक पुस्तकालय अधिनियम लागू हुआ। वर्तमान समय में भारत में क्रमश: - तमिलनाडु, आन्ध्रप्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, केरल, हरियाणा, मणिपुर, मिजोरम, गोवा एवं गुजरात में पुस्तकालय अधिनियम लागू है।

3. पुस्तकालय अधिनियम विभिन्न राज्यों में

भारत के 11 राज्यों में सार्वजनिक पुस्तकालय अधिनियम पारित हो चुके है तथा क्रियाशील है। उन राज्यों का विवरण निम्न है : -
(i) तमिलनाडू (सन् 1948 में) (ii) आन्ध्रप्रदेश (सन् 1960 में) (ii) कर्नाटक (सन् 1965 में)। (iv) महाराष्ट्र (सन् 1967 में) (v) पश्चिम बंगाल (सन् 1979 में) (vi) केरल (सन् 1987 में) (vii) हरियाणा (सन् 1987 में) (viii) मणिपुर (सन् 1988 में) (ix) मिजोरम (सन् 1993 में) (x) गोवा (सन् 1993 में)
(xi) गुजरात (सन् 2001 में) 3.1. तमिलनाडु सार्वजनिक पुस्तकालय अधिनियम, 1948
इस अधिनियम की कुछ विशेषतायें निम्नलिखित हैं1. इस अधिनियम के प्रारम्भिक अंश, जिसमें कि इस अधिनियम का उद्देश्य उल्लेख है। । पुस्तकालय अधिनियम के कुछ आवश्यक शब्दों को छोड़ दिया गया है। वे शब्द है।
"विकास एवं रख-रखाव"
2. अधिनियम में राज्य पुस्तकालय, प्राधिकरण का प्रावधान नहीं है। बल्कि केवल राज्य
पुस्तकालय परामर्श समिति का प्रावधान है, जिसमें 17 सदस्य है।
3. सिद्धान्त इस अधिनियम में अलग से सार्वजनिक पुस्तकालय निदेशक का प्रावधान है।
लेकिन व्यवहारिक रूप में ऐसी बात नहीं है।
4. अधिनियम में सार्वजनिक पुस्तकालय विभाग का प्रावधान नहीं है एवं राज्य केन्द्रीय पुस्तकालय का भी नहीं है। 5. अधिनियम में इस बात का उल्लेख नहीं है कि कौन स्थानीय पुस्तकालय प्राधिकरण का सचिव होगा यद्यपि जिला शिक्षा अधिकारी पदेन सचिव के रूप में कार्यरत है।
6. अधिनियम में स्थानीय पुस्तकालय प्राधिकरण के अधिकार बहुत सीमित हैं वह, विभिन्न शुल्कों की माँग नहीं कर सकता।
7. प्रत्येक स्थानीय पुस्तकालय प्राधिकरण पुस्तकालय निधि स्थापित करेगा जिसके द्वारा इस अधिनियम के अन्तर्गत विभिन्न खर्चे वहन होंगे।
8. मुद्रण एवं ग्रन्थ पंजीकरण अधिनियम 1967 में संशोधन के पश्चात प्रत्येक राज्य प्रकाशक की जिम्मेदारी है कि वह प्रत्येक ग्रन्थ की पाँच प्रतियाँ जमा करें।

3.2. आन्ध्र प्रदेश सार्वजनिक पुस्तकालय अधिनियम, 1960 (संशोधित)

1. इस अधिनियम में राज्य केन्द्रीय पुस्तकालय का प्रावधान है।
2. मद्रास पुस्तकालय अधिनियम के विपरीत इसमें राज्य पुस्तकालय प्राधिकरण के पर राज्य पुस्तकालय समिति का प्रावधान है।
3. संशोधन अधिनियम 1969 के पश्चात राज्य केन्द्रीय समिति सदस्यों का काल 3 से 5 वर्ष कर दिया गया है।
4. इस अधिनियम में तमिलनाडु अधिनियम से कुछ भिन्नता है जैसे इसमें अलग ने सार्वजनिक पुस्तकालय अधिनियम का प्रावधान है। इसके अलावा सार्वजनिक पुस्तकालय का निदेशक अलग होगा।
5. अधिनियम के अनुसार नगर केन्द्रीय पुस्तकालय के पुस्तकालयाध्यक्ष क्रमश: अपने स्थानीय पुस्तकालय प्राधिकरण के सचिव होंगे।
6. जिला पुस्तकालय संस्था के सदस्यों का कार्यकाल संशोधन पश्चात 3 साल से 5 साल कर दिया गया है।
7. इस अधिनियम में राज्य पुस्तकालय समिति की संरचना एवं अधिकारों का उल्लेख नहीं

3.3. कर्नाटक पुस्तकालय अधिनियम, 1965 

1. अधिनियम में एक अलग सार्वजनिक पुस्तकालय विभाग का प्रावधान है। इस
| पुस्तकालय का निदेशक राज्य ग्रन्थालयी होगा।
2. राज्य ग्रन्थालयी के पास आवश्यक व्यवसायिक योग्यता होनी चाहिये इसका मुख्य रूप से अधिनियम में प्रावधान है।
3. नगर पुस्तकालय प्राधिकरण की संरचना में सदस्यों का चयन अधिकतर सरकार दारा नामांकन से होता है।
4. जिला पुस्तकालय प्राधिकरण में भी नामांकित सदस्यों की संख्या ज्यादा है।
5. स्थानीय पुस्तकालय प्राधिकरण कार्यकारी एवं वित्त समिति की नियुक्ति कर सकती है।
6. पुस्तकालय कर, सम्पत्ति कर एवं मकान कर के अलावा स्त्रोतों से भी वसूला जाता है।
अत: पुस्तकालय सेवा के लिए आवश्यक धन एकत्रित हो जाता है।
7. राज्य पुस्तकालय निधि का प्रावधान है।
8. नियम के अंतर्गत कर्मचारियों की योग्यता सम्बन्धी माप दण्डों का उल्लेख नहीं है।
3.4. महाराष्ट्र सार्वजनिक पुस्तकालय अधिनियम, 1967
1. अधिनियम में राज्य पुस्तकालय परिषद का प्रावधान है जिसका कार्य मुख्यतः परामर्श
देना है। इसके अलावा राज्य पुस्तकालय प्राधिकरण का उल्लेख नहीं है।
2. पुस्तकालय निधि में सरकार से धन प्राप्त होता है।
3. अधिनियम के अन्तर्गत योग्य कर्मचारियों की नियुक्ति का प्रावधान है।
4. अधिनियम के अन्तर्गत कोई राज्य केन्द्रीय पुस्तकालय का प्रावधान नहीं हैं।
5. इस अधिनियम में कर का प्रावधान नहीं है।
3.5. पश्चिम बंगाल सार्वजनिक पुस्तकालय अधिनियम, 1979
1. इस अधिनियम में राज्य पुस्तकालय प्राधिकरण का प्रावधान नहीं है। बल्कि केवल | राज्य पुस्तकालय परिषद की स्थापना आवश्यक संरचना के साथ है। इसका कार्य सरकार को परामर्श देना है। सरकार दारा पुस्तकालय निदेशक की नियुक्ति का उल्लेख है। 

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