पुस्तकालय कार्मिकों को उपयोगकर्ताओं द्वारा उपयोग की जाने वाली पाठ्य-सामग्री के बारे में सम्पूर्ण जानकारी
उपयोगकर्ता कई प्रकार के हो सकते हैं और उनके द्वारा भिन्न भिन्न प्रकार की पुस्तकालय सेवाओं की अपेक्षा की जा सकती है। पुस्तकालयों के अनुकूलतम उपयोग को सुनिश्चित करने के लिये उपयोगकर्ताओं की पुस्तकालय और सूचना सम्बन्धी आवश्यकताओं को जानना आवश्यक है।2. उपयोगकर्ता समुदाय
जैसा कि ऊपर बताया गया है आधुनिक पुस्तकालय उपयोगकर्ताओं की ओर उन्मुख होते हैं। पुस्तकालय कार्मिकों को उपयोगकर्ताओं द्वारा उपयोग की जाने वाली पाठ्य-सामग्री के बारे में सम्पूर्ण जानकारी के साथ उनकी अभिरुचियों की विस्तृत जानकारी भी होना चाहिये। उपयोगकर्ताओं दारा चाही गई पाठ्य-सामग्री और उनकी अभिरुचियों का सही अनुमान तभी लगाया जा सकता है जब उनका गहन अध्ययन किया जाये। उपयोगकर्ता कई प्रकार के होते हैं। और उनकी आवश्यकताएँ, अभिरूचियाँ और मांग भी भिन्न भिन्न होती है।
सामान्यत: उपयोगकर्ता वह व्यक्ति होता है जो निम्नलिखित किसी एक या अधिक कारणों से पुस्तकालय में आता है1. पुस्तकालय पाठ्य-सामग्री की जानकारी प्राप्त करने के लिये जैसे पुस्तकें, सामयिक
प्रकाशन, विद्वतपत्र, शोध प्रबन्ध आदि;
2. किसी विशेष प्रलेख के सम्बन्ध में जानकारी या अध्ययन करने के लिये;
3. सन्दर्भ ग्रन्थों के माध्यम से किसी विषय, घटना या कार्य की तथ्यात्मक जानकारी प्राप्त करने के लिये;
4. किसी सामयिक प्रकाशन, सम्मेलन आदि में प्रस्तुत लेख या तकनीकी प्रतिवेदन की फोटोकॉपी प्राप्त करने के लिये; और
5. किसी शोध पत्र का अन्य प्रलेख का अंग्रेजी भाषा में अनुवाद प्राप्त करने के लिये जो किसी अन्य भाषा में प्रकाशित हुआ है।
कोई भी व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह जो उपरोक्त वर्णित कार्यों के लिये पुस्तकालय में आता है तो वह पुस्तकालय का उपयोगकर्ता वर्ग (Users Community) कहलाता है। यह उपयोगकर्ता अलग अलग श्रेणी के हो सकते हैं जैसे छात्र, शिक्षक, नियोजक, व्यवसायी आदि।
3. उपयोगकर्ताओं के विभिन्न वर्ग और उनकी सूचना सम्बन्धी आवश्यकतायें
सामान्यत: हम उपयोगकर्ताओं को निम्नलिखित श्रेणियों में विभाजित कर सकते है। छात्र, शिक्षक, शोधकर्ता, विद्वान, लेखक, नियोजक, नीति विशेषज्ञ, व्यवसायी, प्रबन्धक एवं अधिकारी, उद्योगपति तथा सामान्य पाठक आदि। विभिन्न उपयोगकर्तावर्ग की मांग उनकी विशेष आवश्यकताओं के अनुरूप होती है उदाहरणार्थ एक छात्र सामान्यत: पाठ्य-पुस्तकों, सन्दर्भ ग्रन्थों और सामयिक प्रकाशनों आदि का अभिलाषी होता है। विभिन्न उपयोगकर्ताओं की जानकारी प्राप्त करना तथा उनकी पुस्तकालय तथा सूचना सम्बन्धी आवश्यकताओं का अध्ययन करना किसी भी पुस्तकालय का अस्तित्व बनाये रखने के लिए आवश्यक है।आधुनिक पुस्तकालयों में निम्नांकित प्रकार के प्रलेख संग्रहित रहते हैं
सामान्य पुस्तकें, पाठ्य-ग्रन्थ, मोनोग्राफ्स, सामयिक प्रकाशन (पत्रिकायें), शोध प्रबन्ध, सम्मेलन की कार्यवाहियाँ, सन्दर्भ ग्रन्थ, ग्रन्थ सन्दर्भ सूचियाँ (Bibliographies), अनुक्रमणीकरण तथा सारकरण पत्रिकायें, शासकीय प्रलेख, आयोग और समितियों के प्रतिवेदन, पेटेन्ट्स, मानक (Standards), व्यवसायों से सम्बन्धित साहित्य, लोकप्रिय और मनोरंजनात्मक साहित्य जैसे उपन्यास, जीवन चरित्र, यात्रा विवरण आदि।
उपयोगकर्ताओं के विभिन्न वर्गों दारा विभिन्न प्रकार के प्रलेखों का उपयोग किया जाता है। इन प्रलेखों का पुस्तकालयों तथा सूचना केन्द्रों में अधिकतम उपयोग हो सके, इसके लिये उपयोगकर्ताओं का अध्ययन करना आवश्यक है।
4. उपयोगकर्ता अध्ययन की आवश्यकता
| सेयर्स ने कहा था, 'ग्रन्थ, पुस्तकालय का आधार है।' बिना ग्रन्थों के किसी पुस्तकालय की कल्पना नहीं की जा सकती। किसी भी पुस्तकालय और सूचना केन्द्र का आधारभूत कार्य ग्रन्थ संग्रह निर्माण अथवा ग्रन्थ चयन है। इसीलिये डूरी ने कहा था, 'ग्रन्थ चयन, पुस्तकालय के अन्य समस्त कार्यों जैसे वर्गीकरण, सूचीकरण, सन्दर्भ सेवा, ग्रन्थ परिसंचरणीकरण आदि से पूर्वगामी है।' एल.आर. मेकॉलविन (L R McColvin) ने सर्वप्रथम ग्रन्थ चयन में मांग के सिद्धान्त का समावेश किया। आपके अनुसार "पुस्तकें अपने आप में कुछ नहीं हैं। उनका अपने आप में श्वेत पत्र जिस पर वे मुद्रित हैं, से अधिक कुछ अर्थ नहीं है, जब तक कि उनको मांग के द्वारा उपादेय न बना दिया जाये। जितना अधिक ग्रन्थ चयन मांग से सम्बद्ध होगा, परिणामत: उतनी ही अधिक सार्थक सम्भावित सेवा होगी।" यदि कोई भी पुस्तकालयाध्यक्ष अपने ग्रन्थ संग्रह का अधिकतम और प्रभावशाली उपयोग का अभिलाषी है तो उसको पाठकों की मांगों के अनुरूप ग्रन्थ चयन करना चाहिये।रंगनाथन के पुस्तकालय विज्ञान के प्रथम तीन सूत्रों अर्थात 'ग्रन्थ उपयोगार्थ हैं', 'प्रत्येक पाठक को उसका अभीष्ट ग्रन्थ प्राप्त हो', और प्रत्येक ग्रन्थ को उसका पाठक प्राप्त हो, की सन्तुष्टि के लिये भी नितान्त आवश्यक है कि ग्रन्थ चयन उपयोगकर्ताओं की आवश्यकताओं और मांगों के अनुरूप हो। उपयोगकर्ताओं की आवश्यकताओं, उनकी अभिरुचियों आदि को जानने के लिये उनका अध्ययन करना आवश्यक है।
5. उपयोगकर्ता अध्ययन की उपयोगिता ।
1. उपयोगकर्ताओं के अध्ययन द्वारा ग्रन्थ चयन, उनकी आवश्यकताओं और अभिरुचियोंके अनुरूप हो सकता है।
2. पुस्तकालय सेवा में परिवर्तन और सुधार उदाहरणार्थ पुस्तकालय का कार्यकाल, ग्रन्थों
का विन्यसन अर्थात वर्गीकरण, सूचीकरण, अनुरक्षण आदि उपयोगकर्ताओं की सुविधाओं
और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जा सकता है। 3. सन्दर्भ सेवा, प्रलेखन सेवा आदि की व्यवस्था, उपयोगकर्ताओं की अभिरुचियों और
आवश्यकताओं के अनुरूप की जा सकती है।
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6. उपयोगकर्ता-अध्ययन विधियाँ
उपयोगकर्ताओं की आवश्यकताओं और अभिरुचियों का अध्ययन करने और जानने के लिये कई विधियों अथवा तकनीकियों का उपयोग किया जाता है। हम उनको निम्नानुसार तीन प्रमुख वर्गों में बाँट सकते हैं
1. प्रत्यक्ष विधियाँ (Direct Methods);
2. अप्रत्यक्ष विधियाँ (Indirect Methods); और
3. उपयोगकर्ता सर्वेक्षण (Users Surveys) विधि।
6.1. प्रत्यक्ष विधियाँ (Direct Methods)
इस विधियों से तात्पर्य है उपयोगकर्ताओं से व्यक्तिगत सम्पर्क स्थापित करके उनकी अध्ययन अभिरुचियों और पाठ्य-सामग्री आवश्यकताओं का पता लगाना। यह सम्पर्क पुस्तकालय सीमा में भी किया जा सकता है और पुस्तकालय से बाहर भी किया जा सकता है।
6.1.1. पुस्तकालय सीमा के अन्दर जनसम्पर्क
पुस्तकालय सीमा में ऐसे प्रमुख बिन्दु हैं जहाँ उपयोगकर्ताओं से सम्पर्क किया जा सकता है| 1. परिसंचरण विभाग (Circulation Department); और
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