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6.1.2. पुस्तकालय सीमा के बाहर जनसम्पर्क

Thursday, 3 January 2019

6.1.2. पुस्तकालय सीमा के बाहर जनसम्पर्क

| उपयोगकर्ता अध्येता पुस्तकालय सीमा के बाहर भी उपयोगकर्ताओं की अध्ययन अभिरुचियों का पता लगा सकता है। पुस्तकालय न्यास मण्डल (Board of Trustees of the Library) के माध्यम से अनेक स्थानीय संगठनों से परिचय बढ़ाया जा सकता है। किसी भी नगर में मन्दिर, मस्जिद, चर्च, गुरूद्वारे आदि वह स्थान हैं जहाँ सभी प्रकार के लोग आते हैं। इसी प्रकार की अन्य संस्थायें हैं - क्लब्स, संगीत, नाटक और कला मण्डलियाँ आदि। पुस्तकालय कार्मिक इनकी गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेकर अनेक ऐसे व्यक्तियों के सम्पर्क में आ सकते हैं जो पुस्तकालय के वास्तविक पाठक नहीं हैं परन्तु सम्भाव्य हैं अर्थात बनाये जा सकते हैं। यहाँ उनकी रुचियों और शौकों (Hobbies) आदि का पता लगाकर उनके अनुकूल पाठ्य-सामग्री का अर्जन किया जा सकता है। यहाँ प्रमुख व्यक्तियों (Key People) को जानना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। वे हैं उद्योगों व्यवसायों और सामाजिक जीवन के प्रतिनिधि नेतागण। ये लोग जनसाधारण की सामान्य अभिरुचियों के जानकार होते हैं।
। जैसा कि पूर्व में भी बताया गया है कि भिन्न भिन्न उपयोगकर्ताओं की रुचियाँ भी भिन्न भिन्न होती हैं। बाल और वृद्ध पाठकों की रुचि आकर्षक रूप से मुद्रित चित्रित पाठ्यसामग्री में होती है। छात्र-छात्राओं की अभिरुचि पाठय-ग्रन्थों में होती है। तथ्यों की जानकारी चाहने वाला पाठक विश्वसनीय सन्दर्भ ग्रन्थों का इच्छुक होता है। एक साहित्यकार और कलाकार साहित्यिक और कलात्मक पाठ्य-सामग्री की मांग करता है। इसी प्रकार महिलाओं की रुचि उनके अपने उपयोग में आने वाली पाठ्य-सामग्री में होती है। पुस्तकालयाध्यक्ष का कर्तव्य है कि उन सबको सन्तुष्ट करे।

6.2. अप्रत्यक्ष विधियाँ (Indirect Methods)

उपयोगकर्ता अध्ययन की अप्रत्यक्ष विधि है - पुस्तकालय अभिलेखों का सर्वेक्षण। यह अभिलेख हैं
1. पंजीयन पत्रक
2. परिसंचरण सांख्यकियाँ
3. ग्रन्थ आरक्षण सूची 4. सन्दर्भ प्रश्न
5. पाठकों की अनुशंसायें

6.2.1. पंजीयन पत्रकों (Registration Cards) का अध्ययन

प्रत्येक सदस्यता आवेदक से एक आवेदन पत्र भरवाया जाता है जो कालान्तर में पंजीयन का स्वरूप ग्रहण कर लेता है। इसमें उनकी ज्ञात भाषाओं, व्यवसायों, व्यक्तिगत रुचियों आदि की जानकारी प्राप्त की जा सकती है और इस प्रकार उनकी अध्ययन अभिरुचियों का पता लगाया जा सकता है।

6.2.2. परिसंचरण सांख्यकियों (Circulation Statistics) का अध्ययन

परिसंचरण सांख्यकियों को भाषानुसार और विषयानुसार रखकर, उपयोगकर्ताओं की अध्ययन अभिरुचियों को विश्वसनीय रूप से जाना जा सकता है।
6.2.3. ग्रन्थ आरक्षण सूची (List of Reserves) का अध्ययन
उपयोगकर्ता अध्येता, ग्रन्थ आरक्षण सूची का अध्ययन करके उपयोगकर्ताओं की पठनपाठन आवश्यकताओं और अभिरुचियों का वास्तविक ज्ञान प्राप्त कर सकता है। यह अध्ययन विशेष रूप से पुस्तकों के विरावृत्तीकरण के लिये उपयोगी सिद्ध होता है। इसके द्वारा लोकप्रिय पुस्तकों की जानकारी प्राप्त होती है।
6.2.4. सन्दर्भ प्रश्न (Reference Questions) अभिलेख का अध्ययन
उपयोगकर्ताओं की सूचना सम्बन्धी आवश्यकताओं की जानकारी प्राप्त करने के लिये यह एक महत्वपूर्ण साधन है। अनुत्तरित प्रश्न सन्दर्भ सामग्री की अनुपस्थिति के द्योतक हैं। सन्दर्भ प्रश्नों का अध्ययन करके पुस्तकालयाध्यक्ष यह पता लगा सकता है कि पाठकों को कैसी सन्दर्भ सामग्री की आवश्यकता है।
6.2.5. पाठकों की अनुशंसाओं (Recommendations) का अध्ययन
आधुनिक पुस्तकालय पाठकों से ग्रन्थों की अनुशंसायें आमन्त्रित करते है और पुस्तकालय सेवा में सुधार के लिये सुझाव भी आमन्त्रित करते हैं। इनके अध्ययन के द्वारा पुस्तकालयाध्यक्ष, उपयोगकर्ताओं की पाठ्य-सामग्री - आवश्यकताओं और पुस्तकालय में पाठ्यसामग्री की कमी की ओर आकृष्ट होता है।
6.3. उपयोगकर्ता सर्वेक्षण (Users Surveys)
उपयोगकर्ता सर्वेक्षण, उपयोगकर्ता अध्ययन का सर्वाधिक सशक्त और महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। इस सर्वेक्षण के दारा पुस्तकालय के वास्तविक उपयोगकर्ताओं (Actual Users) तथा सम्भाव्य उपयोगकर्ताओं (Potential Users) दोनों की अध्ययन अभिरुचियों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। सर्वेक्षण के लिये कुछ उपकरणों की आवश्यकता पड़ती है जैसे नगर का मानचित्र, जनसंख्या आंकड़े अथवा प्रतिवेदन, पूर्व में किये गये सर्वेक्षण प्रतिवेदन आदि।

6.3.1. उपयोगकर्ता सर्वेक्षण से तात्पर्य

मोरिस लाइन (Morice Line) ने उपयोगकर्ता सर्वेक्षण की परिभाषा इस प्रकार की है, "पुस्तकालयों से सम्बन्धित दत्त (Data) सामग्री, उनके क्रिया-कलापों, प्रक्रियाओं, कार्मिक, उपयोग और उपयोगकर्ताओं का व्यवस्थित संकलन।" क्योंकि पुस्तकालय और सूचना केन्द्र सामाजिक संस्थान है, सर्वेक्षण विधि को पुस्तकालय सेवाओं और उनके उपयोगों की जाँचपड़ताल के आधार के रूप में सफलतापूर्वक अपनाया गया है।
6.3.2. उपयोगकर्ता सर्वेक्षण की आवश्यकता
उपयोगकर्ताओं के सम्बन्ध में पर्याप्त ज्ञान, उनक़ी अध्ययन अभिरुचियों और मांगों की जानकारी प्रभावशाली पुस्तकालय और सूचना सेवा के लिये नितान्त आवश्यक है। एक पुस्तकालयाध्यक्ष को जानना चाहिये
1. उपयोगकर्ताओं में कौन वस्तुत: पुस्तकालय और पुस्तकालय सेवाओं का उपयोग कर रहे
2. किन सेवाओं का उपयोग हो रहा है; 3. उनके उपयोग की क्या बारम्बारता (Frequency) है; और 4. किन उद्देश्यों की पूर्ति के लिये इन सेवाओं का उपयोग किया जा रहा है?
इसके साथ पुस्तकालयाध्यक्ष को यह जानना भी समान रूप से महत्वपूर्ण है कि किस प्रकार पुस्तकालय पाठ्य-सामग्री को उपयोग न करने वाले लोगों को नियमित उपयोगकर्ताओं के रूप में परिणित किया जा सकता है। पुस्तकालयाध्यक्ष को यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि उसका पुस्तकालय कहाँ तक समग्र सूचना प्रसारण तन्त्र में उपयुक्त बैठता है। पुस्तकालय सेवा के नियोजन, उनमें सुधार और उनका अधिकतम उपयोग करवाने के लिये उपयोगकर्ताओं, उनकी सूचना आवश्यकताओं और अभिरुचियों को ज्ञात करना आवश्यक है।
6.3.3. उपयोगकर्ता सर्वेक्षण के उद्देश्य
उपयोगकर्ता सर्वेक्षण को निम्नांकित उद्देश्यों की सम्पूर्ति के लिये किया जाता है।
1. पुस्तकालय की वर्तमान स्थिति को आँकने के लिये;
2. वर्तमान पुस्तकालय तन्त्र की प्रभावशीलता की जाँच करने के लिये;
3. अपर्याप्तता अथवा दोषों को दूर करने की दृष्टि से ग्रन्थालयीनता के किसी क्षेत्र का
मूल्यांकन करने के लिए अथवा आगामी चरण के नियोजन के लिये।

6.3.4. उपयोगकर्ता सर्वेक्षण के प्रकार

सर्वेक्षण निम्नांकित चार प्रकार के हो सकते हैं1. वर्णनात्मक (Descriptive) सर्वेक्षण; 2. विश्लेषणात्मक (Analytical) अथवा व्याख्यात्मक (Explanatory) सर्वेक्षण; 3. सर्वेक्षणकर्ता आधारित (Surveyor-based) सर्वेक्षण; और
4. उपयोगकर्ता आधारित (Users-based) सर्वेक्षण। वर्णनात्मक सर्वेक्षण वर्णनात्मक सर्वेक्षण, स्थिति का वर्णन करते है। इनका उद्देश्य किसी स्थिति के सम्बन्ध में बिना दो घटनाओं के सम्बन्ध और उनकी व्याख्या दिये तथ्यों को संकलित और व्याख्यायित करना है।
विश्लेषणात्मक अथवा व्याख्यात्मक सर्वेक्षण इनमें किसी घटना (Phenomenon) के बारे में परिकल्पना (Hypothesis) निर्मित करने का प्रयास किया जाता है, दो घटनाओं अथवा क्रियाओं के सम्बन्ध पर दृष्टिपात किया जाता है और उन सम्बन्धों की व्याख्या करने का प्रयास किया जाता है।
सर्वेक्षणकर्ता आधारित सर्वेक्षण
इस आधार पर तीन प्रकार के सर्वेक्षण हो सकते हैं1. स्वतः सर्वेक्षण - इन सर्वेक्षणों को सामान्यत: पुस्तकालय के ही किसी व्यक्ति अथवा समूहों द्वारा किया जाता है। 

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