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6.3.6. उपयोगकर्ताओं का प्रादर्श (Sample) लेने की विधियाँ

Thursday, 3 January 2019

6.3.6. उपयोगकर्ताओं का प्रादर्श (Sample) लेने की विधियाँ

संसाधनों के सीमित होने के कारण समग्र सृष्टि (Universe) का अध्ययन-परीक्षण करना सम्भव नहीं होता है। उदाहरण के लिये यदि भारतीय विश्वविद्यालयीन पुस्तकालय के पाठकों की अध्ययन-अभिरुचियों का सर्वेक्षण करना है तो विश्वविद्यालयों की संख्या 200 से भी ऊपर है और पाठकों की संख्या लाखों में है। उन सब का अध्ययन सम्भव नहीं है। अत: समग्र का प्रतिनिधित्व करने वाली उस सृष्टि के एक अंश को चुना जाता है। इसी को प्रादर्शीकरण (Sampling) कहते हैं। प्रादर्शीकरण निष्पक्ष (Unbiased) होना चाहिये।
प्रादर्शीकरण की प्रमुख विधियाँ निम्नानुसार है|
1. आकस्मिक (Random) प्रादर्शीकरण
इस विधि को लॉटरी विधि का नाम भी दिया जा सकता है। उदाहरणार्थ भारतीय विश्वविद्यालयों की एक सूची वर्णक्रम अथवा स्थापना वर्षों के अनुसार निर्मित कर ली जाये और हर पाँचवे या दसवें विश्वविद्यालयीन पुस्तकालय को सर्वेक्षण के लिये चुन लिया जाये।
2. उद्देश्यमूलक प्रादर्शीकरण (Purposive Sampling) -
केवल ऐसे विश्वविद्यालयीन पुस्तकालयों को चुना जाये जहाँ पर्याप्त पुस्तकालय सेवायें उपलब्ध हों।
3. परतों के क्रम वाला प्रादर्शीकरण (Stratified Sampling) - | इस प्रादर्शीकरण में कुछ प्राचीन और अर्वाचीन; कुछ सामान्य और कुछ विशिष्ट; कुछ बड़े और कुछ छोटे विश्वविद्यालयीन पुस्तकालयों को सर्वेक्षण हेतु चुना जा सकता है।

6.3.7. पूर्व परीक्षण (Pre-testing)

सामान्यत: पूर्ण परीक्षण करने से पूर्व, एक पूर्व परीक्षण करने का परामर्श यह जानने के लिये दिया जाता है कि उक्त सर्वेक्षण के उद्देश्यों की सम्पूर्ति होगी अथवा नहीं? इस अवस्था पर गलतियों को दूर किया जा सकता है और विधियों में सुधार अथवा परिवर्तन किया जा सकता है।
6.3.8. स्वयं में पूर्ण परीक्षण (Full-scale Survey)
सफल-पूर्व परिक्षण के उपरान्त पूर्ण सर्वेक्षण का कार्य किया जा सकता है। समस्त प्रासंगिक तथ्यों को ईमानदारी से एकत्रित करना चाहिये जिससे सर्वेक्षण पूर्ण विश्वसनीय हो और निष्कर्ष सही हो।
6.3.9. दत्त सामग्री (data) का विश्लेषण
इसके उपरान्त दत्त सामग्री का विश्लेषण अर्थात कोडिंग (Coding), वर्गीकरण, और तालिकाकरण (Tabulation) किया जाता है और निष्कर्ष प्राप्त किये जाते हैं।

6.3.9.1. प्रतिवेदनीकरण (Reporting)

अन्त में सर्वेक्षणकर्ता, अपने सर्वेक्षण का प्रतिवेदन प्रस्तुत करता है जिसमें उसके द्वारा प्राप्त निष्कर्षों और सुझावों का वर्णन किया जाता है। इसमें पर्याप्त तालिकाओं, ग्राफ्स (Graphs), चार्टस, डायग्राम्स (Diagrams) आदि का उपयोग सर्वेक्षण को अधिक विश्वसनीय और प्रभावशाली बना सकता है।
7. सारांश
यदि पुस्तकालय और उसकी सेवाओं का अधिकतम, प्रभावशाली और सार्थक उपयोग करवाना है और पुस्तकालय विज्ञान के सूत्रों को पूर्ण सन्तुष्टि प्रदान करना है तो उपयोगकर्ताओं की पाठ्य-सामग्री आवश्यकताओं और अध्ययन अभिरुचियों को जानना नितान्त आवश्यक है। इसके लिये उपयोगकर्ता अध्ययन करना चाहिये। जिसकी कई विधियाँ हैं। यह अध्ययन पुस्तकालय परिसीमा में पाठकों से व्यक्तिगत सम्पर्क स्थापित करके और विभिन्न पुस्तकालय अभिलेखों का अध्ययन करके किया जा सकता है। पुस्तकालय सीमा से बाहर उपयोगकर्ता सर्वेक्षण (Users Survey), उपयोगकर्ता- अध्ययन का एक सशक्त और प्रभावशाली माध्यम है।
8. अभ्यासार्थ प्रश्न 1. आप उपयोगकर्ता अध्ययन (Users Studies) से क्या समझते हैं? इसकी
आवश्यकता, उपयोगिता और उद्देश्यों की चर्चा कीजिये।
2. उपयोगकर्ता सर्वेक्षण (Users Surveys) की आवश्यकता और उपयोगिता की चर्चा करते हुए इसकी विभिन्न विधियों का संक्षिप्त वर्णन कीजिये।
9. विस्तृत अध्ययनार्थ ग्रन्थसूची
1. Guha, B , Documentation and Information. 1983.
2. Mittal, R L, Library Administration. 1978. 3. Prasher, R G , Information and its Communication. 1991.

इकाई- 15 : पुस्तकालय संघों की भूमिका (Role of Professional Associations)

उद्देश्य इस इकाई के निम्नलिखित उद्देश्य है -
1. पुस्तकालय संघ को परिभाषित कर इनके उद्देश्यों, कार्यों, एवं प्रकारों से परिचित होना, 2. भारतीय पुस्तकालय संघ, आइजलिक अमेरिकन पुस्तकालय संघ एवं लाइब्रेरी | एसोसियेशन के क्रियाकलापों से अवगत होना।
संरचना
1. विषय प्रवेश । 2. पुस्तकालय संघ के उद्देश्य 3. पुस्तकालय संघ के कार्य 4. पुस्तकालय संघ के प्रकार
प्रमुख पुस्तकालय संघ 5.1 भारतीय पुस्तकालय संघ 5.2 आइजलिक 5.3 आइटलिस 5.4 अमेरिकन पुस्तकालय संघ
5.5 लाइब्रेरी एसोसियेशन (यू. के.) 6. सारांश 7. अभ्यासार्थ प्रश्न
8. विस्तृत अध्ययनार्थ ग्रन्थसूची 1. विषय प्रवेश ।
'संघ शब्द का शाब्दिक अर्थ समान उद्देश्यों हेतु बनाया गया व्यक्तियों के समूह से है। आज व्यावसायिक संगठनों/ संघों का निर्माण एक सामान्य बात है। विभिन्न व्यवसायों के संघ जैसे इंडियन मेडिकल एसोसियेशन, इण्डियन इन्स्टीट्यूट ऑफ इन्जीनियर्स, इंडियन चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स आदि इस प्रकार के संघों के कुछ उदाहरण हैं। पुस्तकालय व्यवसाय भी इसका अपवाद नहीं है। अपने-अपने देशों में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान सेवाओं के विकास एवं उन्नयन हेतु संयुक्त राज्य अमेरिका में अमेरिकन लाइब्रेरी एसोसियेशन की स्थापना 1876 में, ग्रेट ब्रिटेन में लाइब्रेरी एसोसियेशन की 1877 में, तथा भारत में इंडियन लाइब्रेरी एसोसियेशन की 1933 में हुई। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पुस्तकालय संघों- एफ. आई. डी. की स्थापना 1895 में तथा इफला की स्थापना 1926 में हुई। इस इकाई में पुस्तकालय संघ के उद्देश्य, कार्य, प्रकार एवं प्रमुख पुस्तकालय संघों का अध्ययन करेंगे।
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2. पुस्तकालय संघ के उद्देश्य

हर संघ के समान पुस्तकालय संघ पुस्तकालय व्यवसाय से जुड़े व्यक्तियों को संगठित करके उनमें भ्रातृत्व की भावना जाग्रत करने का प्रयास करता है। पुस्तकालय संघ के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं
1. पुस्तकालय व्यवसाय के सदस्यों की भलाई का कार्य करना,
2. पुस्तकालयों के विकास हेतु पुस्तकालय आन्दोलन एवं पुस्तकालय अधिनियम के लिये प्रयास करना,
3. पुस्तकालय व्यवसाय की सामाजिक उन्नति के लिये प्रयास कर उसके स्तर की वृद्धि
करना,
4. पुस्तकालय कर्मचारियों के प्रशिक्षण के सुधार हेतु प्रयास करना तथा कार्यरत कर्मचारियों हेतु पुनश्चर्या कार्यक्रम (Refresher Course) एवं सतत शिक्षा कार्यक्रमों का प्रबन्ध करना,
5. पुस्तकालय कर्मचारियों के लिये मजदूर संघ (Trade Union) के रूप में कार्य करना
अर्थात् उनके वेतन, भत्तों आदि की वृद्धि के लिये प्रयास करना, पुस्तकालय व्यवसाय के जुड़े व्यक्तियों के लिये सम्मेलनों, सभाओं, गोष्ठियों आदि का आयोजन करना एवं पुस्तकालय विज्ञान पत्रिकाओं का प्रकाशन कर उन्हें व्यवसाय में होने वाली नई शोधों एवं प्रक्रियाओं से परिचित करना,
7. जनता में पुस्तकालय के प्रति जागरूकता हेतु 'विश्व पुस्तक दिवस' 'पुस्तकालय सप्ताह'
आदि का आयोजन करना,एवं |
 8. पुस्तकालय सहयोग एवं स्रोतों की सहभागिता की भावना हेतु प्रयास करना।

3. पुस्तकालय संघ के कार्य

पुस्तकालय कर्मचारियों को संगठित कर एक मंच प्रदान करने, पुस्तकालय व्यवसाय को प्रति अन्य व्यवसायों के समान प्रतिष्ठित व्यवसाय का स्तर प्रदान करने तथा विश्व के सभी राष्ट्रों में पुस्तकालय आन्दोलन को गति देने में पुस्तकालय संघ जीवंत शक्ति का कार्य करते हैं। भारत सरकार द्वारा सार्वजनिक पुस्तकालयों दारा प्रदत्त सेवाओं का सर्वेक्षण कर उचित परामर्श हेतु 'पुस्तकालय परामर्श समिति' 

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