6.3.5. उपयोगकर्ता सर्वेक्षण का नियोजन (Planning)
2. बाहरी विशेषज्ञों दारा सर्वेक्षण - यह सर्वेक्षण बाहरी पुस्तकालय विशेषज्ञों दारा किये जाते3. अग्रन्थालयियों दारा सर्वेक्षण - इसमें लोक प्रशासक, व्याख्याकार अथवा सक्षमता यन्त्रियों को पुस्तकालय सर्वेक्षण हेतु आमन्त्रित किया जाता है। उपयोगकर्ता आधारित सर्वेक्षण इनके दारा
(1) पुस्तकालय की सीमा के अन्दर सामान्य उपयोगकर्ताओं का अध्ययन किया जा सकता है;
(2) पुस्तकालय सीमा के अन्दर विशेषज्ञ उपयोगकर्ताओं का अध्ययन किया जा सकता है;
(3) पुस्तकालय सीमा के बाहर सामान्य उपयोगकर्ताओं का अध्ययन किया जा सकता है; और
(4) पुस्तकालय सीमा के बाहर विशेषज्ञ उपयोगकर्ताओं का अध्ययन किया जा सकता है। सामान्यत: पुस्तकालयाध्यक्ष द्वारा उपयोगकर्ता आधारित व्याख्यात्मक सर्वेक्षण किया जाता है।
सर्वेक्षण नियोजन के चरण (steps)
बी. गुहा (B Guha) ने अपनी पुस्तक “Documentation and Information” में सर्वेक्षण नियोजन के निम्नांकित चरण (steps) अंकित किये हैं1. सर्वेक्षण के उद्देश्यों को परिभाषित करना;
2. सर्वेक्षण के क्षेत्र अथवा व्याप्तीकरण (coverage) का निर्णय करना;
3. सर्वेक्षण के काल का वरण करना;
4. सर्वेक्षण करने की विधि का चयन करना;
5. उपयोगकर्ताओं का प्रादर्श (Sample) लेने की विधि का चुनाव करना;
6. पूर्व परीक्षण करना;
7. स्वयं में पूर्ण सर्वेक्षण करना;
8. दत्त सामग्री (Data) का विश्लेषण करना; और
9. प्रतिवेदन लेखन।
6.3.5.1. सर्वेक्षण के उद्देश्यों को परिभाषित करना
। सर्वप्रथम सर्वेक्षण के उद्देश्यों को परिभाषित किया जाना चाहिये और उपयुक्त अध्ययन विधि और विश्लेषण को उद्गमित करना चाहिये। उद्देश्यों के निर्धारण के पश्चात दत्त सामग्री (Data) के संकलन और विश्लेषण की विधि का निर्धारण किया जा सकता है।6.3.5.2. सर्वेक्षण के क्षेत्र अथवा व्याप्तीकरण (Coverage) का निर्णय करना
व्याप्तीकरण से तात्पर्य उन उपयोगकर्ताओं अथवा पुस्तकालयों अथवा अभिलेखों से है। जिनका सर्वेक्षण किया जायेगा अथवा भौगोलिक दृष्टि से सर्वेक्षण के क्षेत्र से है। इस बिन्दु पर यह भी निर्णय कर लेना चाहिये कि सर्वेक्षण समग्र होगा अथवा प्रादर्श (Sample)।
6.3.5.3. सर्वेक्षण-काल का वरण (Choice of Timing of the Survey) करना
सर्वेक्षण-काल के वरण का महत्व सर्वेक्षण का स्पष्ट और विश्वसनीय चित्र प्राप्त करने के लिये महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिये परीक्षा काल में शैक्षणिक पुस्तकालयों का उपयोग बहुत बढ़ जाता है। अत: उस समय किया गया सर्वेक्षण उपयोग और उपयोगकर्ताओं का सही और वास्तविक चित्रण प्रस्तुत नहीं कर सकेगा। अत: सुचित होगा कि शैक्षणिक सत्र की मध्यावधि सर्वेक्षण के लिये चुनी जाये।
6.3.5.4. सर्वेक्षण करने की विधि का चयन करना।
सर्वेक्षण करने अथवा जाँच पड़ताल करने और दत्त (Data) एकत्रीकरण करने की निम्नांकित प्रमुख विधियाँ हैं1. प्रश्नावली विधि;
2. साक्षात्कार विधि;
3. अवलोकन विधि;
4. दैनन्दिनी (Diary) विधि;
5. पुस्तकालय अभिलेखों की विश्लेषण विधि;
6. प्रकरण-अध्ययन (Case-study) विधि; और
7. जाँच सूची (Checklist) विधि।
6.3.5.4.1. प्रश्नावली विधि (Questionnaire Method)
इस विधि में दत्त संकलन के लिये सर्वेक्षणकर्ता एक प्रश्नावली का निर्माण करता है। और उपयोगकर्ताओं को भेजता है। यह दत्त संकलन की सर्वाधिक प्रचलित और लोकप्रिय विधि है। भौगोलिक दृष्टि से दूरस्थ और बिखरे हुए क्षेत्रों का दत्त संकलन करने के लिये यह एक आवश्यक और श्रेष्ठ विधि है।इस विधि की कुछ परीसीमाएँ भी हैं। अनेक उत्तरदाता प्रश्नावली भरकर नहीं भेजते है। अथवा अपूर्ण भेजते हैं। अनेक उत्तरदाता सही उत्तर नहीं देते है और कभी कभी प्रश्नों का वास्तविक अर्थ ही नहीं समझ पाते हैं।
6.3.5.4.2. साक्षात्कार विधि (Interview Method)
इस विधि में सर्वेक्षणकर्ता प्रश्नावली के साथ उत्तरदाता से व्यक्तिगत सम्पर्क करके दत्त सामग्री का संकलन करता है। इस विधि में प्रश्नावली विधि के दोष कुछ सीमा तक दूर हो जाते हैं। साक्षात्कार की एक तकनीक होती है। सर्वेक्षणकर्ता उसमें दक्ष होना चाहिये। | इस विधि की भी कुछ परिसीमाएं हैं। यह विधि अत्यन्त व्यय-साध्य और समय साध्य है। अनेक उत्तरदाता, सर्वेक्षणकर्ता के समक्ष असामान्य हो जाते हैं और इस प्रकार उत्तरदाता और सर्वेक्षणकर्ता दानों ही विचित्र स्थिति में फंस जाते हैं। लेकिन सर्वेक्षणकर्ता इस विधि से बहुत विश्वसनीय जानकारी प्राप्त कर सकता है।6.3.5.4.3. अवलोकन विधि (Observation Method)
इस विधि में सर्वेक्षणकर्ता, सर्वेक्षण सृष्टि का अवलोकन करता है और कोई प्रश्न आदि नहीं पूछता है। यह सामान्यत: दो प्रकार का हो सकता है1. भागीदारी प्रकार का (Participant type) अवलोकन;
2. गैर भागीदारी प्रकार का (Non-participant) अवलोकन।
भागीदारी प्रकार के अवलोकन में सर्वेक्षणकर्ता स्वयं भी उन जैसा बनकर उनमें घुलमिल जाता है और गैर-भागीदारी अवलोकन में वह उन जैसा नहीं बनता है अपितु उनके साथ रहकर उनकी गतिविधियों का अध्ययन करता है।
इस विधि के द्वारा काफी सीमा तक सही और विश्वसनीय आकलन किये जा सकते हैं। वैज्ञानिक अवलोकन प्राय: एक कठिन कार्य होता है चाहे स्थिति सरल हो अथवा जटिल।
6.3.5..4 दैनन्दिनी विधि (Diary Method) | इस विधि में उत्तरदाता से एक काल-विशेष के अपने क्रिया-कलापों का अभिलेख अथवा फीता अभिलिखित (Tape Recorded) अभिलेख अथवा दैनन्दिनी (Diary) रखने का निवेदन किया जाता है। इस कार्य को और दत्त सामग्री के विश्लेषण को सुविधाजनक बनाने के लिये उत्तरदाताओं को उनके विभिन्न क्रिया-कलापों को अभिलेखित करने के लिये दैनन्दिनी प्रारूप (Diary forms) प्रदान किये जाते हैं।
इस विधि में कभी कुछ उत्तरदाता अपूर्ण सूचना अभिलेखित करते हैं। वैसे यह विधि उत्तरदाता अभिरुचियों की तथ्यात्मक जानकारी प्राप्त करने की अत्यन्त उपयोगी विधि मानी जाती है।
6.3.5.4.5. पुस्तकालय अभिलेखों (Library Records) की विश्लेषण विधि
सभी पुस्तकालयों में वार्षिक प्रतिवेदन, सांख्यकियाँ और अन्य अभिलेख रखे जाते हैं। इन दस्तावेजों और अभिलेखों का अध्ययन उपयोगकर्ताओं की पाठ्य-सामग्री आवश्यकताओं और अभिरुचियों को जानने के लिये किया जा सकता है। यह प्रमुख अभिलेख हैं - पंजीयन पत्रक, परिसंचरण सांख्यकियाँ, ग्रन्थ आरक्षण सूची, सन्दर्भ प्रश्न अभिलेख और पाठकों की अनुशंसायें। इनकी चर्चा ऊपर की जा चुकी है।6.3.5.4.6. प्रकरण - अध्ययन विधि (Case study Method)
इस विधि में प्रकरण विशेष की गतिविधियों का अध्ययन सर्वेक्षणकर्ता दारा किया जाता है। इस विधि को अपनाना तब ही उचित है जब जिस सृष्टि (Universe) का अध्ययन किया जा रहा है वह छोटी हो।
6.3.5.4.7. जाँच सूची विधि (Check List Method)
इस विधि में सर्वेक्षणकर्ता पहले से ही एक मानक जाँच सूची निर्मित कर लेता है और उसको आधार बनाकर सर्वेक्षण करता है। कार्ल व्हाइट (Carl White) ने दिल्ली विश्वविद्यालय पुस्तकालय का सर्वेक्षण करने के लिये इसी विधि का अनुसरण किया। उन्होंने यह निर्णय किया कि “Winchell's Guide to Reference Books" में जो सन्दर्भ-ग्रन्थ अंकित हैं वह किसी भी विश्वविद्यालयीन पुस्तकालय में होने चाहिये। अब देखना यह है कि उनमें से कितने सन्दर्भग्रन्थ सर्वेक्षणाधीन उस पुस्तकालय में विद्यमान हैं।
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