प्रथम स्तरीय विवरण (First Level of Description)
(References) भाग-2के प्रत्येक अध्याय में प्रारंभ में सामान्य नियम तथा बाद में विशेष नियम दिये हैं । विशेष नियम के अभाव में सामान्य नियम ही लागू होते हैं । सूची संहिता के अन्त में निम्नलिखित चार परिशिष्ट (Appendices) दिये गये हैंपरिशिष्ट A : बड़े अक्षरों का प्रयोग(Capitalization) परिशिष्ट B : संकेताक्षर
| (Abbreviation) परिशिष्ट C : संख्यापद
(Numerals) परिशिष्ट D : पारिभाषिक शब्दावली
(Glossary) संहिता के अन्त में दी गई अनुक्रमणिका द्वारा सम्बन्धित नियम तक सुगमता से पहुँचा जा सकता है ।। 3. विवरण के स्तर (Levels of Description)
ए.ए.सी.आर,-2 शोधित ए. ए. सी. आर.-2- (1978) एवं संशोधित ए. ए. सी. आर.-2 (1988) में तीन स्तरीय ग्रंथालयों-छोटे, मध्यम एवं विशाल हेतु विवरणात्मक सूचीकरण के अलग-अलग स्तरीय विवरण प्रथम, वितीय एवं तृतीय का प्रावधान किया गया है ।3.1 ए. ए. सी. आर-2 के नियमांक 1.0D 1 के अनुसार छोटे ग्रंथालयों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए संक्षिप्त प्रकार तथा सूचीकरण हेतु प्रथम स्तरीय विवरण का प्रावधान किया गया है, जिसमें ग्रन्थ की पहचान हेतु न्यूनतम सूचनायें दी जल जाती हैं।
इसमें मात्र मुख्य आख्या को ही सम्मिलित किया जाता है तथा अन्य आख्याओं को छोड़ दिया जाता है ।।
इसी प्रकार उत्तरदायित्व क्षेत्र में भी शीर्षक के समान होने पर उत्तरदायित्व विवरण लिखने को आवश्यकता नहीं होती । संस्करण विवरण को तो अंकित किया जाता हैं परन्तु संस्करण विशेष के उत्तरदायित्व विवरण को नहीं लिखा जाता । इसी प्रकार इसमें ग्रन्थ के भौतिक स्वरूप सम्बन्धित न्यूनतम सूचनायें ही अंकित की जाती हैं । इसे निम्नलिखित आरेखीय चित्र द्वारा अधिक स्पष्टता से समझा जा सकता है
Title Proper/ First statement of responsibility, if different from main entry heading in form or number or if there is no main entry heading, - Edition statement, - Material (Or type of publication)
Specific details, - First publisher, etc., date of publication, etc.-Extent of item, - Note(s), - Standard number.
3.2. दवितीय स्तरीय विवरण (Second level of Description)
ए. ए. सी. आर. -2 के नियमांक 1.0D 2 के अनुसार वितीय स्तर में प्रथम स्तर की सभी सूचनाओं के अतिरिक्त मुख्य आख्या के बाद सामान्य सामग्री पद (General material designation), समानान्तर आख्या तथा अन्य सभी आख्याएं भी दी जाती हैं । इस स्तर में सभी प्रकार के उत्तरदायित्व विवरण को भी सम्मिलित किया जाता है | संस्करण विवरण के साथ- साथ उससे सम्बन्धित उत्तरदायित्व क्षेत्र में नियमानुसार सभी सूचनायें अंकित की जाती हैं । यह स्तर मध्यम श्रेणी के ग्रन्थालयों के सूचीकरण हेतु प्रस्तावित है । इसे निम्नलिखित आरेखीय चित्र दवारा स्पष्टता से समझा जा सकता हैTitle proper [general material designation] = parallel title: other title information/ first statement of responsibility; each subsequent statement of responsibility,-Edition statement/First statement of responsibility relating to the edition, - Material (or type of Publication) specific detail, - First place of publication, etc.: first publisher etc. Date of publication ,etc.- Extent of item : other physical details, dimensions,-(Title proper of series/statement of responsibility relating to series, ISSN of Series; numbering with in the series, Title of subseries; ISSN of subseries; numbering with subseries).- Note(s).Standard number.
3.3. तृतीय स्तरीय विवरण (Third Level of Description)
ए. ए. सी. आर.-2 के नियमांक 1.0D 3 के अनुसार विशाल एवं शोध ग्रन्थालयों के उपयोगकर्ताओं की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सूची संहिता के सभी नियमों में प्रस्तावित सूचनायें इस स्तर में अंकित की जाती हैं ।
| ग्रन्थालयों में सूची के विवरण के स्तर का निर्धारण ग्रन्थालयों के स्वरूप, प्रकार एवं पाठ्कीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए किया जाता है । सामान्यतया ग्रन्थालयों में
वितीय स्तर का प्रयोग किया जाता है । इस पुस्तिका में सभी प्रविष्टियां इसी स्तर के अनुसार बनाई गई हैं ।
4. प्रविष्टियों के प्रकार एवं संरचना (Varieties of Entries and their Structure)
| ए. ए. सी. आर.-2 के अनुसार निर्मित शब्दकोशीय सूची में निम्नलिखित प्रकार की प्रविष्टियां होती हैं1. मुख्य प्रविष्टि 2. इतर या सहायक प्रविष्टियां
3. निर्देश इन प्रविष्टियों को निम्नलिखित तालिका द्वारा अधिक सुगमता से समझा जा सकता है :
ufafe (Entry)
मुख्य प्रविष्टि (Main Entry)
इतर प्रविष्टि (Added Entry)
निर्देश (Reference)
विषय प्रविष्टि (Subject Entry)
सहलेखक प्रविष्टि (Joint Author Entry)
सहकारक प्रविष्टि (Collaborator Entry)
आख्या प्रविष्टि (Title Entry)
ग्रन्थमाला प्रविष्टि (Series Entry)
सम्पादक प्रविष्टि (Editor Entry)
संकलनकर्ता प्रविष्टि (Compiler Entry)
संशोधक प्रविष्टि (Reviser Entry)
अनुवादक प्रविष्टि चित्रकार प्रविष्टि आदि (Translator Entry) (Illustrator Entry etc.)
देखिये निर्देश | इसे भी देखिये निर्देश नाम आख्या निर्देश व्याख्यात्मक निर्देश
(See Reference) (See also Reference) (Name title Reference) (Explanatory Reference) 4.1 मुख्य प्रविष्टि की संरचना (Structure of Main Entry)
पत्रकों पर निर्मित की जाने वाली मुख्य प्रविष्टि को निम्नलिखित भागों में किया जाता
1. क्रमांक अंक अनुच्छेद (Call Number Section) 2. शीर्षक अनुच्छेद (Heading Section) 3. आख्या एवं प्रकाशनादि विवरण अनुच्छेद (Title and Imprint Section) 4. भौतिक विवरण एवं ग्रन्थमाला अनुच्छेद (Physical Description and Series Section) 5. टिप्पणी अनुच्छेद (Note Section) 6. अन्तर्राष्ट्रीय मानक ग्रन्थ संख्या (International Standard Book Number)
7. परिग्रहण संख्या (Assession Number) 8. संकेत (Tracing)
उपर्युक्त सभी आठों भागों को मुख्य प्रविष्टि पत्रक के मुख भाग (Front portion) पर क्रमानुसार अंकित किया जाता है यदि मात्र संकेत अनुच्छेद हेतु मुख भाग पर स्थान शेष न रहे। तो मुख्य प्रविष्टि पत्रक पर नीचे की ओर दाहिने Over लिख कर संकेत अनुच्छेद मुख्य प्रविष्टि पत्रक के पश्च भाग पर अंकित किया जाता है। पर यदि अन्य कोई भाग भी मुख भाग पर न समा सके तो मुख भाग के दाहिने ओर Continued on Next Card पद अंकित कर नवीन पत्रक पर प्रथम काल्पनिक पंक्ति पर 2, यथास्थान क्रमांक अंक तथा शीर्षक लिख कर शेष बचे अनुच्छेद अंकित किये जाते हैं। | इन भागों को अग्रलिखित चित्र दवारा स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है:मुख्य प्रविष्टि पत्रक
(Main Entry Card) Call Number Section
Heading Section Acc. No.
Title and imprint section .......
......
Physical description and serious section.....
Note Section ISBN Tracing
1. क्रमांक अंक अनुच्छेद (Call Number Section): यह अनुवर्ण सूची की मुख्य प्रविष्टि
का प्रथम भाग होता है । इसमें ग्रन्थ का क्रमांक अंक (वर्गीक+ ग्रन्थांक + संग्राहक यदि हो तो) लिखा जाता है । क्रमांक अंक मुखपृष्ठ के पश्च भाग (Verso of title page) से लिया जाता है । हाशिये (Margin) में एक अक्षर की जगह छोड़ कर तृतीय काल्पनिक पंक्ति पर वर्गीक तथा अग्ररेखा (Leading Line) पर ग्रन्थांक अंकित किया जाता है । यदि संग्राहक भी हो तो उसे वितीय काल्पनिक पंक्ति पर अंकित किया जाता है । यद्यपि ए. ए. सी. आर-2 में इसे पेन्सिल से अंकित करने का निर्देश नहीं दिया गया है परन्तु इसमें परिवर्तन की सम्भावना को ध्यान में रखते हुए इसे पेन्सिल से ही लिखा जाना उपयुक्त होगा । इस अनुच्छेद की समाप्ति पर पूर्ण विराम (Full Stop) नहीं लगाया जाता ।
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